बाकी सब ठीक है
लोगों ने पूछा मैं सुनता हूँ
मैंने कहा- हाँ मैं सुनता हूँ
लोगों ने पूछा- तुम देखते हो
मैंने कहा- हाँ मैं देखता हूँ
लोगों ने फिर पूछा-
तब क्या तुम बोलते भी हो
मैंने कहा- हाँ मैं बोलता भी हूँ
एक प्रश्न फिर पूछा लोगो ने-
कब से और कहाँ
मैंने कहा-
सदियों से अपनी कविताओं में
उन्होंने कहा- चलो हटो
कविता तो चीज है मनोरंजन की
खेल है
कागज और कलम के बीच की
कुछ और हो जो बोलो
मैंने कहा- कुछ नहीं, बाकी सब ठीक है
तब से मुझे लोगों ने नहीं देखा
पर मैं हूँ
और मेरी कविता ही
बोलती है....।
पर मैं हूँ
ReplyDeleteऔर मेरी कविता ही
बोलती है....।
वाह!
आपका शुक्रिया.. अनुपमा जी...
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