वास्तविक सत्य
जब मैं इस ओर था तो
रौनक उस ओर थी
जब मैं उस ओर था तो रौनक
फिर दूसरी ओर थी
तब मुझे लगा गलती उसकी नहीं
मेरी ही है
क्योंकि मैं नहीं जान पाया
भोजन का एक निवाला
गुदा-द्वार से निकलने से पहले
किन प्रक्रियाऔं से गुजरता है
कितनी लम्बी यात्रायें करता है
नहीं जान पाया
अभी तो मैं गन्धहीन,स्वादहीन हूँ
शायद तभी
मेरी पीठ में धंसा फरसा
निकाल नहीं पाया मेरा
एक भी बूँद रक्त.
No comments:
Post a Comment