Tuesday, June 26, 2012

तुम्हारे बिना

                       तुम्हारे बिना

मरना क्या होता है
एक पल की खुशी का भी छिन जाना
जीवन भर की प्यास के बाद भी
न मिलना
एक घूँट पानी और
चाहना कि जी लूँ
तुम्हारे बिना...
शायद, मगर जाने क्या सोचकर
एक आस बिछ जाती आज भी
सुबह-सुबह सूरज की धूप-सी
साँझ ढले सिमट जाती
रोज-रोज
एक साँझ ढल जाती
सुबह-सुबह दिन कहीं सो जाता
ओढ़ चादर रात की ।
पर, दिख जाते हैं हरे-हरे पेड़
सूखते जंगलों में
बावजूद इसके
पहाड़ पर खड़ा गुलमोहर अकेला
लाल-लाल फूलों से लदा हुआ
प्रतीक्षा में है सूख जाने के
तुम्हारे बिना.... ।

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