वे जो चुप रहते हैं
वे जो चुप रहते हैं
उतना ही बोलते हैं
जितना दुनिया के मतलब का होता है
अपने मतलब का वे बोल नहीं पाते
दूसरे के मतलब का वे हँसते हैं
अपने मतलब का
प्यार भी वे बाँट देते हैं
अपने मतलब का
वे अक्सर सबकुछ खो देते हैं
वे जो चुप रहते हैं .
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