तुम्हारा घर
तुम्हारा घर जिसे आराम कहते हैं
थकी माँदी साँझ कहते हैं
एक तीली, एक चुटकी, एक झपकी
महक अगरू की लहरती
दिन ढले की
रात रानी सी गँधीली बात तेरी
बैठ जाती हृदय में
दिन ढले का एक सूरज
कँपकपाँता
पानियों में याद आता.
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