Wednesday, June 27, 2012

तुम्हारा घर

तुम्हारा घर

तुम्हारा घर जिसे आराम कहते हैं
थकी माँदी साँझ कहते हैं

एक तीली, एक चुटकी, एक झपकी
महक अगरू की लहरती
दिन ढले की
रात रानी सी गँधीली बात तेरी
बैठ जाती हृदय में
दिन ढले का एक सूरज
कँपकपाँता
पानियों में याद आता.

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