Wednesday, June 27, 2012

दिन-रात

                                 दिन-रात

दिन
एक उजली  रात है
जिसमें हम जागते हैं
हँसते हैं रोते हैं
करते हैं निष्पादित हर जरूरी काम
सपने में

रात
एक अन्धेरे गलियारे-सा दिन है
जहाँ सूरज तारों में बिखरा है
और हम जागते हुए देखते हैं
सोने के सपने.

No comments:

Post a Comment