अनुगूँज
अनुगूँज होती मेरे हृदय स्पन्दन में
जीवन के स्वछंद रहस्यों से परे
अभिव्यक्ति होती एक
स्मृतियों की रेखाओं से
स्मृति की सतह पर
भावनाएँ जाग उठती
जो थोड़ी हैं विस्तृत-सी
इस हृदय से, मन से
उसके लिए
प्रेरित और आह्लादित करती
हृदय स्मृति और मन को.
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